डॉक्टरों का कहना है कि कानु की हालत अभी स्थिर है, लेकिन अभी खतरा टला नहीं है। डॉ. गौतम के मुताबिक हमने स्किन ग्राफ्टिंग कर दी है। उन्हें पूरी तरह ठीक होने में 15-20 दिन लग सकते हैं। पुलिस ने कैलाशबेन को गिरफ्तार कर लिया है। उसने पहले बताया पुलिस को बताया कि कुछ गहने गिरवी रखने को लेकर पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। बाद में यह खुलासा हुया कि इस आशंका में थी कि पति किसी दूसरी जवान महिला के फेर में उसे छोड़ न दे।
Saturday, 7 March 2009
झगड़ा हुआ तो पति का लिंग काट दिया !
झगड़े के बाद एक पत्नी को अपने पति पर इतना गुस्सा आया कि उसने अपने सोए हुए पति का लिंग काट दिया। पुलिस ने बताया कि अहमदाबाद के अमराइवाडी इलाके में यह घटना हुई। 1 मार्च की शाम कैलाशबेन मकवाना (23) का अपने पति कानुसिंह (23) से झगड़ा हो गया। इस पर कैलाशबेन को इतना गुस्सा आया कि उसने चाय में बेहोशी की दवा मिला कर पिला दी और बेहोशी छाने पर रसोई के चाकू से उसका लिंग काट दिया। कानुसिंह का काफी खून बह गया था। उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उनका दो घंटे तक ऑपरेशन चला।
डॉक्टरों का कहना है कि कानु की हालत अभी स्थिर है, लेकिन अभी खतरा टला नहीं है। डॉ. गौतम के मुताबिक हमने स्किन ग्राफ्टिंग कर दी है। उन्हें पूरी तरह ठीक होने में 15-20 दिन लग सकते हैं। पुलिस ने कैलाशबेन को गिरफ्तार कर लिया है। उसने पहले बताया पुलिस को बताया कि कुछ गहने गिरवी रखने को लेकर पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। बाद में यह खुलासा हुया कि इस आशंका में थी कि पति किसी दूसरी जवान महिला के फेर में उसे छोड़ न दे।
डॉक्टरों का कहना है कि कानु की हालत अभी स्थिर है, लेकिन अभी खतरा टला नहीं है। डॉ. गौतम के मुताबिक हमने स्किन ग्राफ्टिंग कर दी है। उन्हें पूरी तरह ठीक होने में 15-20 दिन लग सकते हैं। पुलिस ने कैलाशबेन को गिरफ्तार कर लिया है। उसने पहले बताया पुलिस को बताया कि कुछ गहने गिरवी रखने को लेकर पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। बाद में यह खुलासा हुया कि इस आशंका में थी कि पति किसी दूसरी जवान महिला के फेर में उसे छोड़ न दे।
मूल समाचार यहाँ पढ़ा जा सकता है।
Tuesday, 3 February 2009
अमीर परिवारों की महिलायों ने चार दिन तक युवक से बलात्कार किया: युवक की हालत बेहद खराब
कराची पुलिस ने एक युवक का अपहरण करने और उसके साथ बलात्कार करने के आरोप में तीन अज्ञात महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन महिलाओं पर आरोप है कि इन्होंने इस युवक के साथ चार दिनों तक बलात्कार किया और जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तो उसे कय्यूमाबाद नदी के पास फेंक दिया। पीड़ित युवक की उम्र 23 वर्ष है और उसका नाम खलील मोहम्मद है।
पाकिस्तान के डेली टाइम्स की खबर है कि खलील, कराची के क्लिफटन (नीलम कॉलोनी) इलाके के एक छोटे से रेस्टोरेंट में वेटर का काम करता है। वह कुछ दिनों पहले ही रहिमयार खान शहर से कराची आया था। खलील ने बताया कि 27 जनवरी की रात को एक व्यक्ति ने रेस्टोरेंट में आकर कहा कि बाहर कार में बैठीं महिलाओं को खाना देकर आओ। ऑर्डर देने के बाद वह व्यक्ति कार की तरफ चला गया। खाना देने के लिए जैसे ही खलील कार की तरफ गया, कार में बैठीं महिलाएं ने कहा कि वह इस इलाके में नई हैं और उन्हें इलाके की जानकारी नहीं है। खलील के मुताबिक उनमें से दो महिलाएं लगभग 25 साल की थी, जबकि तीसरी 30 साल से ज्यादा उम्र की थी।
महिलाओं ने खलील से कहा कि वह उनके घर रोज खाना पहुंचा दिया करे और उनके साथ चलकर उनका घर देख ले। घर पहुंचने पर महिलाओं ने उसे पीने के लिए दूध जैसा द्रव दिया। जिसे पीने के बाद उसे नशा महसूस होने लगा। जैसे ही खलील को होश आया उसने देखा कि एक महिला उसके साथ अश्लील हरकतें कर रही थीं। महिलाओं ने चार दिन तक खलील के साथ दुराचार किया और उसके बाद उसे कय्यूमाबाद नदी के पास फेंक दिया। फिलहाल खलील की हालत काफी खराब है। उसके गुप्तांग से खून निकल रहा है और वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा है।
रजा के मुताबिक महिलाएं कराची के पॉश इलाके क्लिफटन की हैं और अमीर परिवारों से ताल्लुक रखती हैं।
मूल समाचार यहाँ देखा जा सकता है
Tuesday, 6 January 2009
सगी चाची के ट्रंक में मिली मासूम की लाश
बेऔलाद सगी चाची के ट्रंक में मिली, डेढ़ वर्षीय अजय की लाश ये साफ बयां करती है कि दस बरस से एक औरत औलाद के लिए किस तरह बिलबिला रही होगी और उसने ये दिल दहला देने वाला कदम भी उठा लिया। 21 जून 2007 को मासूम अजय का पहला व अंतिम जन्मदिन पूरे हर्षोल्लास से मनाया गया. महिलाएं यह कहकर मुंह में चुन्नी डाल लेती हैं कि एक औरत मासूम को मार डालेगी, हाय उसकी आत्मा भी नहीं कांपी। मृतक मासूम अजय, पेशे से किसान अमरजीत सिंह का इकलौता पुत्र था।
बलकार सिंह की पहली पत्नी उर्मिला का करीब 12 बरस पहले निधन हो गया था और वह अपने पीछे दो बच्चे भी छोड़ गई थी, सुमित्रा से करीब दस बरस पहले उसका विवाह हुआ था। सुमित्रा को हर समय बच्चे की चाह लगी रहती थी, हालांकि उसका पति अपने दोनों बच्चों को उसे अपना बच्चा मानने के लिए कहता था, लेकिन ये बात कभी उसके गले नहीं उतरी
मृतक मासूम अजय की चार वर्षीय बहन मनीषा को यकीन नहीं आ रहा है कि उसके इकलौते भाई को उसकी चाची की हवस निगल गई है। वह स्तब्ध है और बार-बार पूछ रही है कि उसका भाई कहां है। दादी जमुना देवी और दादा दल सिंह भी उम्र के इस पड़ाव में ये सब देखकर बैचेन हैं। उनके लिए दोनों ही उनके बेटे हैं। इस उम्र में बहू उनके नाम पर इतना बड़ा कलंक लगाएगी, ये उन्होंने ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा।
बलकार सिंह की पहली पत्नी उर्मिला का करीब 12 बरस पहले निधन हो गया था और वह अपने पीछे दो बच्चे भी छोड़ गई थी, सुमित्रा से करीब दस बरस पहले उसका विवाह हुआ था। सुमित्रा को हर समय बच्चे की चाह लगी रहती थी, हालांकि उसका पति अपने दोनों बच्चों को उसे अपना बच्चा मानने के लिए कहता था, लेकिन ये बात कभी उसके गले नहीं उतरी
मृतक मासूम अजय की चार वर्षीय बहन मनीषा को यकीन नहीं आ रहा है कि उसके इकलौते भाई को उसकी चाची की हवस निगल गई है। वह स्तब्ध है और बार-बार पूछ रही है कि उसका भाई कहां है। दादी जमुना देवी और दादा दल सिंह भी उम्र के इस पड़ाव में ये सब देखकर बैचेन हैं। उनके लिए दोनों ही उनके बेटे हैं। इस उम्र में बहू उनके नाम पर इतना बड़ा कलंक लगाएगी, ये उन्होंने ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा।
पति के अवैध संबंधों के बारे में पता चला तो उसके गुप्तांग ही जला दिए!
दक्षिण ऑस्ट्रेलियाई शहर एडीलेड में रहने वाले भारतीय मूल के सतीश नारायण की पत्नी रजनी नारायण ने यह बात कबूल कर ली है कि उसने अपने पति के गुप्त अंगो को जलाने की कोशिश की थी। रजनी ने अपने पड़ोसियों को बताया कि जब उसे पति के अवैध संबंधों के बारे में पता चला तो गुस्से में उसने उन्हें जलाने की कोशिश की थी। उसने कहा कि उसे इस बात का बिलकुल भी अंदाजा नहीं था कि इससे उसके पति सतीश की मौत हो जाएगी।
रजनी ने पड़ोसियों को बताया था कि उसके पति का किसी दूसरी औरत के साथ अंतरंग संबंध थे, जबकि पत्नी होने के नाते पति के शरीर पर सिर्फ पत्नी का हक है। रजनी के वकील ने अदालत से अपील की है कि उसे मनोचिकित्सक से जांच के बाद जमानत दे दी जाए। गौरतलब है कि रजनी पर पहले हत्या के प्रयास का आरोप लगा था जिसे सतीश की मौत होने के बाद हत्या के आरोप में तब्दील कर दिया गया।
रजनी ने पड़ोसियों को बताया था कि उसके पति का किसी दूसरी औरत के साथ अंतरंग संबंध थे, जबकि पत्नी होने के नाते पति के शरीर पर सिर्फ पत्नी का हक है। रजनी के वकील ने अदालत से अपील की है कि उसे मनोचिकित्सक से जांच के बाद जमानत दे दी जाए। गौरतलब है कि रजनी पर पहले हत्या के प्रयास का आरोप लगा था जिसे सतीश की मौत होने के बाद हत्या के आरोप में तब्दील कर दिया गया।
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Monday, 10 November 2008
दादी ने किया पोती को वेश्यावृत्ति पर मजबूर
एक दादी व उसके दो बेटों पर यह आरोप है कि उन्होंने नाबालिग पोती को जबरन जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल दिया। इस घटना में तीन और लोग भी शामिल हैं। बुटाना पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर उसकी दादी, दो चाचा सहित 6 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है। आरोपी पिछले दो महीने से नाबालिग को डरा-धमाकर उससे जबरन वेश्यावृत्ति करा रहे थे। नाबालिग दसवीं की छात्रा बताई जा रही है। राष्ट्रीय सहारा में विकास सुखीजा की रिपोर्ट है कि पुलिस ने नाबालिग का मेडिकल चेकअप करा लिया है। साथ ही अमित गर्ग की अदालत में पेशकर बयान कलमबंद करा दिए हैं। इसके बाद पुलिस ने उसे एसडीएम के समक्ष भी पेश किया जहां पर नाबालिग के कहने पर उसे उसकी बहन को सौंपा गया है।
गांव बैडसाल निवासी स्व. नरेंद्र सिंह की 15 वर्षीय बेटी कविता (बदला हुआ नाम) अपनी बहन के साथ थाने आकर अपनी दादी अमरजीत कौर, चाचा जोगिंद्र सिंह, सर्वजीत सिंह व तीन अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दी कि ये लोग उससे पिछले दो माह से डरा-धमकाकर वेश्यावृति करा रहे हैं। मना करने पर ये लोग उसके साथ मारपीट करते थे। पीड़िता ने बताया कि अभी तक उसके साथ कई दर्जन लोगों ने जबरन शारीरिक सबंधं बनाए हैं। इसी शहर की एक दादी पर अपने पोते-पातियों को जन्म से पहले मार देने का सनसनीखेज आरोप लगा था।
गांव बैडसाल निवासी स्व. नरेंद्र सिंह की 15 वर्षीय बेटी कविता (बदला हुआ नाम) अपनी बहन के साथ थाने आकर अपनी दादी अमरजीत कौर, चाचा जोगिंद्र सिंह, सर्वजीत सिंह व तीन अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत दी कि ये लोग उससे पिछले दो माह से डरा-धमकाकर वेश्यावृति करा रहे हैं। मना करने पर ये लोग उसके साथ मारपीट करते थे। पीड़िता ने बताया कि अभी तक उसके साथ कई दर्जन लोगों ने जबरन शारीरिक सबंधं बनाए हैं। इसी शहर की एक दादी पर अपने पोते-पातियों को जन्म से पहले मार देने का सनसनीखेज आरोप लगा था।
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Sunday, 9 November 2008
दादी बनी कंस: आठ बार बहू का गर्भ गिरवाया
राजा कंस की कहानी राजा कर्ण की नगरी में फिर से दोहराई गई है। फर्क केवल इतना है कि उस समय देवकी के बच्चे जन्म ले चुके थे लेकिन इस कहानी में मासूमों को गर्भ के भीतर ही मार दिया गया। बेहद आश्जर्यजनक बात यह है कि इस दरिंदगी को किसी मामा ने नहीं बल्कि एक दादी मां ने अन्धविश्वास के चलते अन्जाम दिया है।
मामला उस समय सामने आया जब एक बार फिर दादी ने अपनी बहू का अपहरण करने के बाद उसके पेट में पल रहे आठ माह के बच्चे का जबरन गर्भपात करा दिया और उसे गंभीर हालत में स्थानीय बस स्टैंड के बाहर फेंककर फरार हो गई। ये उनका आठवां बच्चा था। तांत्रिकों के मकड़जाल में फंसी सास ने आठ बार तांत्रिक सिद्धि से अपनी बहू की कोख में पल रहे बच्चों को पैदा होने से पहले ही मार डाला। आठवां गर्भ गिरने के बाद बेहोशी की हालत में विवाहिता को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने आनंद विहार की रहने वाली विवाहिता कांता के बयान दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
अस्पताल में उपचाराधीन विवाहिता कांता के भाई राजेंद्र ने आरोप लगाया कि कांता की सास ने अपने पुत्र के मोह में फंसकर आठ बार गर्भ गिरवाने का काम किया है। किसी तांत्रिक ने कांता की सास को यह कहा था कि अगर वह बच्चे को जन्म देगी तो उसके पुत्र की मृत्यु हो जाएगी। कांता के परिजन बार-बार गर्भ गिरने से काफी हताश थे।
कांता के भाई राजेंद्र का कहना है कि इस बार वह अपनी बहन को राजौंद से करनाल ले आए थे और यहां उसके बच्चे को जन्म देने का मन बनाया था। राजेंद्र का कहना है कि उन्होंने अपनी बहन कांता की शादी करीब 12 वर्ष पहले कैथल जिले के राजौंद निवासी विजय से की थी। उसकी बहन आठ बार गर्भवती हुई, लेकिन एक भी संतान को वह जन्म नहीं दे पाई। राजेंद्र का कहना है कि इस बार उसकी बहन के गर्भ में आठ माह का बच्चा था, लेकिन इस बार भी उसके बच्चे को पैदा होने से पहले ही खत्म कर दिया गया। कांता की सास ने फिर उसकी बहन का अपहरण कर लिया और तांत्रिक सिद्धि से उसके गर्भ को गिरा डाला है। कांता को कार में सवार होकर आए दो व्यक्तियों की मदद से उसकी सास उठाकर ले गई थी। बेहोशी की हालत में उसकी बहन करनाल के बस अड्डे पर मिली। कांता के पति विजय ने भी आशंका जताई है कि उसकी मां ने बच्चों को कोख में ही मारने का काम किया है। पुलिस ने अस्पताल में कांता के बयान दर्ज करने के बाद छानबीन शुरू कर दी है।
मामला उस समय सामने आया जब एक बार फिर दादी ने अपनी बहू का अपहरण करने के बाद उसके पेट में पल रहे आठ माह के बच्चे का जबरन गर्भपात करा दिया और उसे गंभीर हालत में स्थानीय बस स्टैंड के बाहर फेंककर फरार हो गई। ये उनका आठवां बच्चा था। तांत्रिकों के मकड़जाल में फंसी सास ने आठ बार तांत्रिक सिद्धि से अपनी बहू की कोख में पल रहे बच्चों को पैदा होने से पहले ही मार डाला। आठवां गर्भ गिरने के बाद बेहोशी की हालत में विवाहिता को ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने आनंद विहार की रहने वाली विवाहिता कांता के बयान दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
अस्पताल में उपचाराधीन विवाहिता कांता के भाई राजेंद्र ने आरोप लगाया कि कांता की सास ने अपने पुत्र के मोह में फंसकर आठ बार गर्भ गिरवाने का काम किया है। किसी तांत्रिक ने कांता की सास को यह कहा था कि अगर वह बच्चे को जन्म देगी तो उसके पुत्र की मृत्यु हो जाएगी। कांता के परिजन बार-बार गर्भ गिरने से काफी हताश थे।
कांता के भाई राजेंद्र का कहना है कि इस बार वह अपनी बहन को राजौंद से करनाल ले आए थे और यहां उसके बच्चे को जन्म देने का मन बनाया था। राजेंद्र का कहना है कि उन्होंने अपनी बहन कांता की शादी करीब 12 वर्ष पहले कैथल जिले के राजौंद निवासी विजय से की थी। उसकी बहन आठ बार गर्भवती हुई, लेकिन एक भी संतान को वह जन्म नहीं दे पाई। राजेंद्र का कहना है कि इस बार उसकी बहन के गर्भ में आठ माह का बच्चा था, लेकिन इस बार भी उसके बच्चे को पैदा होने से पहले ही खत्म कर दिया गया। कांता की सास ने फिर उसकी बहन का अपहरण कर लिया और तांत्रिक सिद्धि से उसके गर्भ को गिरा डाला है। कांता को कार में सवार होकर आए दो व्यक्तियों की मदद से उसकी सास उठाकर ले गई थी। बेहोशी की हालत में उसकी बहन करनाल के बस अड्डे पर मिली। कांता के पति विजय ने भी आशंका जताई है कि उसकी मां ने बच्चों को कोख में ही मारने का काम किया है। पुलिस ने अस्पताल में कांता के बयान दर्ज करने के बाद छानबीन शुरू कर दी है।
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Friday, 7 November 2008
बेटा पैदा करने के लिए कोई दबाव नहीं, फिर भी एक माँ ने तीन बेटियों को मार डाला
एक बेटा पैदा करने की चाहत में उड़ीसा के पुरुषोत्तम गांव की एक 31 वर्षीया महिला शुभद्रा दास ने 5 नवम्बर को अपनी 7 वर्षीय बेटी पद्मिनी को नींद में ही घर के पिछवाड़े में बने तालाब में ले जाकर डूबो दिया। इसी तरह उसने अपनी दूसरी बेटी 4 वर्षीया सुमित्रा को भी मार डाला। जब पुलिस को तलाब से दो बच्चियों की लाश मिली, तो उसने शुभद्रा से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान शुभद्रा ने इस बात का खुलासा किया कि, कुछ हफ्ते पहले ही उसने अपनी तीसरी नौ महीने की बच्ची का गला घोंटकर हत्या की है। चौंकाने वाली बात यह है कि शुभद्रा ने ये बात स्वीकार की, उसने अवसाद और परेशानी में ऐसा अमानवीय काम किया। अवसाद से घिरी शुभद्रा ने खुद को भी मारना चाहा, लेकिन वो जिंदा बच गई। शुभद्रा ने कहा कि, “मैंने अपनी तीनों बेटियों को मारने के बाद खुद भी आत्महत्या करने की कोशिश की। लेकिन इसके बावजूद मैं जिंदा बच गई।” पुलिस का कहना है कि शुभद्रा दास पर अपने पति या फिर ससुराल वालों की तरफ से बेटा पैदा करने के लिए कोई दबाव नहीं था।
सीएनएन-आईबीएन पर जजाति करण के अनुसार केन्द्रपाड़ा के उप-प्रभागीय पुलिस अधिकारी जयदेव सारंगी ने कहा कि, “जांच के बाद हमें मालूम चला कि शुभद्रा को इस बात का मलाल था कि बेटा न होने की वजह से उसके परिवार में अंतिम संस्कार कोई नहीं कर पाएगा, और इसी बात से वह काफी परेशान थी।” सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की हत्याएं धार्मिक मान्यताओं के चलते होती है। ऐसे ही एक सामाजिक कार्यकर्ता दीप्ति रंजन दास ने कहा कि, “हमारे यहां ‘पिंड दान’ जैसी कई प्रथाएं हैं जिसे केवल एक बेटा ही सम्पन्न कर सकता है, और ऐसी प्रथाएं ही लोगों को ऐसे अमानवीय कार्य करने के लिए मजबूर करती है।”
जजाति करण का आगे कहना है 'शायद यही वजह है कि शुभ्रदा दास जैसी महिलाएं अपनी तीन बेटियों की हत्या करने के बाद भी एक बूंद आंसू नहीं बहाती हैं।'
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