
वर्षा ने जिन दो महिलाओं को गुलाम बनाकर रखा था, उसमें से एक 2002 और दूसरी 2005 में इंडोनेशिया से आई थी। इन दोनों को वर्षा पैसे नहीं देती थी बलिक इनके परिवार वालों को सौ डॉलर प्रति महीने भेज देती थी। उनके पासपोर्ट और सभी कानूनी कागजात छीन लिए गए थे और उन्हें लगातार मारा-पीटा जाता था, भूखे रखा जाता था। एक बार जब एक नौकरानी भूख बर्दाश्त नहीं कर पाने के कारण कचरे के डिब्बे से खाना बीन कर खाने लगी तो वर्षा ने उसे लाल मिर्चियां खाने पर मजबूर किया और मिर्च खाते-खाते जब कड़ुवाहट बर्दाश्त नहीं कर पाने के कारण नौकरानी ने उल्टी कर दी तो उसे वर्षा ने वही वमन वापस खाने पर मजबूर किया। वर्षा उन नौकरानियों को फर्श पर सोने और कड़कड़ाती ठंड में ठंडे पानी से नहाने की सजा अक्सर देती थी।
उसका भांडा तब फूटा जब कुछ महीने पहले उसकी एक नौकरानी घर से निकल भागी। वह घूमती हुई एक खाने के स्टोर में चली गई। तब उसके बदन पर कपड़े नहीं बल्कि फटे- पुराने चीथड़े लटक रहे थे। उसकी हालत देख कर स्टोर के मालिक ने पुलिस को फोन कर दिया। वर्षा को अमानवीय प्रताड़ना देने के आरोप में और उसके पति महेन्द्र को इन अत्याचारों को नहीं रोकने तथा उससे लाभ उठाने के आरोप में सजा मिलेगी। जज आर्थर स्पैट का कहना था, "महेंद्र सभनानी ख़ुद एक कामयाबी की कहानी हैं जिन्होंने भारत से आकर अमरीका में अप्रवासी के दौर से गुज़रकर व्यापार में कामयाबी हासिल की। उन्हें तो इन सारी चीज़ों का अंदाज़ा ज़रूर रहा होगा और उन्होंने अत्याचार रोकने के लिए कुछ नहीं किया।" महेंदर 51 साल के हैं और वर्षा 45 साल की। इनके परिवार में दो बेटियां औऱ एक बेटा हैं। तीनों बच्चे भी सज़ा सुनाने के समय अदालत में मौजूद थे।
महेंदर और वर्षा को पिछले साल मई में गिरफ़्तार किया गया था। सभनानी दंपत्ति न्यूयॉर्क के करोड़पतियों में गिने जाते हैं। न्यूयॉर्क के साथ-साथ इनका विश्व के कई देशों में परफ़्यूम का बिज़नेस फैला हुआ है। सभनानी परिवार के वकील का कहना है कि उनके मुवक्किल को बहुत कठोर सज़ा सुनाई गई है।